राजस्थान जिला दर्शन (दूदू) : दूदू जिला दर्शन : rajasthan jila darshan  

By | April 13, 2024
राजस्थान जिला दर्शन (ढूढ) : दूदू जिला दर्शन : rajasthan jila darshan  

इस पोस्ट के दूदू जिला दर्शन जो की राजस्थान का नया जिला है इसके बारे में बताया गया। जो आपके राजस्थान में सभी प्रतियोगी परीक्षाओ में महत्वपूर्ण होंगे और आपकी तैयारी को बेहतर बनाएगे। नीचे दिए गए दूदू जिला दर्शन को अच्छे से पढ़े और अपनी तैयारी को बेहतर बनाइये।

दूदू जिला दर्शन : दूदू जिले की सम्पूर्ण जानकारी 

  • दूदू जिले की स्थापना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा 7 अगस्त, 2023 को की गई।
  • फरवरी 2023 में दूदू को नगरपालिका का दर्जा दिया गया था। 
  • देश का प्रथम जिला जो सीधा ग्राम पंचायत से जिला बना है। 
  • 17 मार्च, 2023 को जयपुर से अलग करके दूदू को नवीनतम जिला घोषित किया गया, 6 अगस्त 2023 को इसकी अधिसूचना जारी की गई, 7 अगस्त 2023 को स्थापना समारोह मनाया गया। 
  • जयपुर जिले से अलग कर एक विधानसभा क्षेत्र के साथ दूदू नये जिले के रूप में आया। 
  • जयपुर जिले का पुनर्गठन कर दूदू  जिले का गठन किया गया। 
  • फरवरी 2023 के बजट में दूदू को ग्राम पंचायत से नगर पालिका का दर्जा दिया गया और 2023 में जिला बनाने की घोषणा की गई।     
  • प्राचीन नाम – दुदावती 
  • राजस्थान का सबसे कम तहसील व उपखण्ड वाला जिला है। 
  • दूदू जिले के अधिकार क्षेत्र में 3 उपखंड एवं 3 तहसीलें सम्मिलित हैं।
  • दूदू में ढूंढाड़ी व् मारवाड़ी भाषा का प्रभाव है। 
उपखण्ड      तहसील
 दूदू   दूदू   
 फागी    फागी     
मौजमाबाद     
मौजमाबाद    
  

दूदू जिले का भौगोलिक परिदृश्य

  • पड़ोसी जिले – राज्य के अजमेर, टोंक एवं जयपुर ग्रामीण की सीमा दूदू से लगती हैं।
  • एकमात्र जिला जो ग्राम पंचायत से सीधा जिला बना ।
  • दूदू की अक्षांशीय स्थिति – 26.68 उत्तरी अक्षांश 
  • दूदू की देशांतरीय स्थिति – 75.23 पूर्वी देशांतर 
  • मिट्टी – कछारी मिट्टी
  • जलवायु – शुष्क जलवायु
  • नया गाँव – राजस्थान का पहला सोलर गाँव
  • दूदू एक अन्तर्वती जिला है। 
  • राष्ट्रीय राजमार्ग 48 गुजरता है। 
  • भूतो की बावड़ी जिसका निर्माण एक रात में हुआ था 
  • 52 चूल्हो की हवेली स्थित है। 
  • दिगम्बर जैन का 500 वर्ष पुराना गुफाओ का मंदिर स्थित है। 
  • न्याय का चबूतरा स्थित है। 

दूदू जिले का सांस्कृतिक परिदृश्य

  • जन्म- अहमदाबाद (गुजरात) (1544 ई. में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को हुआ)
  • पालन-पोषण – लोदीरामजी ब्राह्मण
  • उपनाम – राजस्थान का कबीर
  • गुरु का नाम – बुड्ढनजी (वृद्धानंदजी)
  • स्थापना – दादू पंथ
  • प्रधानपीठ – नरायणा (दूदू)
  • दादूदयालजी 19 वर्ष की आयु में राजस्थान आए तथा 1568 ई. में सांभर में इन्होंने प्रथम उपदेश दिया था
  • दादू पंथ में सत्संग स्थल को ‘अलख दरीबा’ कहते हैं।
  • इनके मंदिर को दादूद्वारा कहा जाता है
  • 1585 ई. में दादूदयालजी ने आमेर के राजा भगवंतदास के साथ फतेहपुर सीकरी (उत्तरप्रदेश) में मुगल सम्राट अकबर से मुलाकात की थी। 
  • दादूदयालजी का देहांत – दादूदयाल जी मारवाड़ तथा ढूंढाड़ की यात्रा करते हुए 1602 ई. में नरायणा में आ गए तथा यहीं ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी 1603 ई. को इनका देहांत हो गया।
  • दादूदयाल जी का शरीर भैराणा की पहाड़ी के नीचे ‘दादूखोल’ नामक स्थान पर रख दिया गया था। दादू-पंथी इस स्थान को अत्यन्त पवित्र मानते हैं।
  • दादूपंथ में मृत व्यक्ति को जलाते या दफनाते नहीं है बल्कि खुले मैदान में पशु-पक्षियों के खाने के लिए रख दिया जाता है।
  • मुख्य मेला- फाल्गुन शुक्ल अष्टमी
  • दादूदयालजी के प्रमुख ग्रंथ – दादू री वाणी व दादू रा दूहा
  • दादूदयाल जी ने अपने उपदेश सरल ढूँढाड़ी (सधुक्कड़ी) भाषा में दिए। 
  • दादूदयाल जी कबीर की तरह सुधारवादी, आचरण और मोक्ष के मूल्यों को मानने वाले तथा परमतत्त्व की तलाश करने वाले थे।
  • दादूदयाल जी ने निर्गुण भक्ति का संदेश दिया।
  • सुप्रसिद्ध ‘कायाबेलि’ ग्रन्थ की रचना दादूदयाल ने की।
  • दादूपंथ की शाखाएँ – खाकी, नागा, खालसा, विरक्त, उत्तरादे
  • दादूदयाल जी के प्रमुख शिष्य – दादू के 152 प्रधान शिष्य थे, जिसमें से 100 शिष्य एकान्तवासी थे किंतु 52 शिष्यों ने स्थान-स्थान पर दादूद्वारों की स्थापना की।
  • इन्हें दादू पंथ का बावन स्तम्भ कहा जाता है। 
  • प्रमुख शिष्य – गरीबदासजी, मिस्किनदासजी, बखनाजी, संतदासजी, जगन्नाथजी व रज्जब जी इत्यादि।
  • जन्म – 1596 ई. में दौसा में हुआ।
  • पिता का नाम – परमानंद
  • माता का नाम  – सती
  • सुन्दरदासजी ने दादूपंथ के दार्शनिक सिद्धांतों का साहित्यिक रचनाओं में पद्यबद्ध किया।
  • सुन्दरदासजी को ‘दूसरा शंकराचार्य’ कहा जाता है।
  • संत सुंदरदास ने दादू पंथ में नागा साधु वर्ग का प्रवर्तन किया।
  • इनके द्वारा 42 ग्रंथों की रचना की गई थी, जिनमें प्रमुख हैं – सुन्दर विलास
  • वर्ष 1707 में इनकी मृत्यु सांगानेर में हुई थी।
  • माधोराजपुरा दुर्ग – दूदू से लालसोट जाने वाले मार्ग पर यह दुर्ग स्थित है। सवाई माधोसिंह प्रथम ने मराठों पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में माधोराजपुरा नामक कस्बा बसाया। इस कस्बे को ‘नवां शहर’ भी कहा जाता था।

दूदू जिले का प्रशासनिक परिदृश्य

  • दूदू जिले के प्रथम जिला कलेक्टर- अर्तिका शुक्ला
  • दूदू जिले के प्रथम पुलिस अधीक्षक- पूजा अवाना

विविध तथ्य

  • ‘लापोड़िया गाँव – दूदू के लापोड़िया गाँव जल प्रबंधन तकनीक के कारण प्रसिद्ध है।
  • लक्ष्मण सिंह – दूदू के लापोड़िया गाँव निवासी समाज सेवी, पर्यावरणविद् लक्ष्मण सिंह खंगारोत को पद्मश्री (2023) से सम्मानित किया गया है। उन्हें ये सम्मान पिछले 40 सालों से पानी बचाने और पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया।
  • देश का प्रथम ई सेवा केंद्र – दूदू 
  • मौजमाबाद – मानसिंह का जन्म स्थल 
  • देशभर में आधार कार्ड योजना की रीलॉन्चिंग दूदू से की गई। 
  • राजस्थान का पहला मेट्रो हॉस्पिटल दूदू में बना। 
  • संत धन्ना भगत की जन्मस्थली – चोरु गाँव 
  • संत मोहनदास मोनी बाबा की तपस्या स्थली – साखुन 
  • प्रमुख पर्यटक स्थल – दादू खोल -भेराडी  की पहाड़ी बिचून , छापरवाड़ा बांध , पुरातत्व गढ़ पैलेस , साखुन किला व् भूतो की बावड़ी। 

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