राजस्थान जिला दर्शन (दौसा) : दौसा जिला दर्शन : Rajasthan jila darshan

By | June 24, 2021
Dausa jila darshan 

दौसा ​जिला दर्शन : दौसा जिले की सम्पूर्ण जानकारी

प्राचीन काल में देवांश/देनवसा अथवा द्यौसा आदि नामों से प्रसिद्ध दौसा क्षेत्र 1137 ई. में दुल्हराय /धोलेराय ने ढूँढाड़ में कच्छावाह वंश की स्थापना की दौसा को राजधानी बनाया। दौसा को 10 अप्रैल, 1991 को जयपुर से पृथक कर नवीन जिले (राज्य का 29 वा ) बनाया । 15 अगस्त, 1992 को सवाई माधोपर जिले की महुआ तहसील को भी दौसा जिले में सम्मिलित किया गया। दौसा जिला राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 11 पर स्थित है। दौसा नगर देवगिरि पहाड़ी की तलहटी में बसा हुआ है।

  • दौसा का क्षेत्रफल : 3432 वर्ग किमी.
  • नगरीय क्षेत्रफल – 37.46 वर्ग किलोमीटर
  • ग्रामीण क्षेत्रफल – 3394.54 वर्ग किलोमीटर
  • दौसा का मानचित्रयीय विस्तार/स्थिति – 25°33′ से 27°33′ उत्तरी अक्षांश तथा 76°50′ से 78°55′ पूर्वी देशान्तर
  • बाणगगा, मोरेल व सनवान दौसा जिले की मुख्य नदियाँ है।
  • बांध — कला खोह , रेडियो बांध , माधोसागर , झील मिल्ली , चिर मिरि।

दौसा के प्रमुख मेले व त्यौहार

  • पीपलाज माता मेला — पीपलाज (वैशाख सुदी अष्टमी)
  • बीजासनी माता मेला — खुर्रा (लालसोट) (चैत्र पूर्णिमा)
  • मेहंदीपुर बालाजी मेला — मेहंदीपुर बालाजी (होली व दशहरा तथा हनुमान जयंती के अवसर पर)
  • श्री रामपुरा का मेला — बसवा तहसील (जन्माष्टमी)

दौसा के प्रमुख मंदिर

  • हर्षत माता का मंदिर, आभानेरी (दौसा) — यह मंदिर 8वीं शताब्दी की प्रतिहार कला का अनुपम उदाहरण है। यह मंदिर वैष्णव सम्प्रदाय का है।
  • झांझीरामपुरा — झांझीरामपुरा की स्थापना ठाकुर रामसिंह ने की। यहाँ झाझेश्वर महादेव का मंदिर है। यहाँ एक ही जलहरी में 121 महादेव हैं। यहाँ निर्मित गौमुख से सर्दियों में गरम तथा गर्मियों में ठंडा पानी बहता है। श्रावण मास में यहाँ विशाल मेला भरता है। यहाँ काल बाबा का मंदिर भी स्थित है।
  • मेंहदीपुर बालाजी — बालाजी (हनुमानजी) का यह प्रसिद्ध मंदिर सिकन्दरा से महुवा के बीच पहाड़ी के पास स्थित है। दो पहाड़ियों के बीच की घाटी में स्थित होने के कारण इसे ‘घाटा मेंहदीपुर’ भी कहते हैं । यहाँ स्थित मूर्ति किसी कलाकार द्वारा गढ़ कर नहीं लगाई गई है बल्कि यह पर्वत का ही एक अंग है। यहाँ हर वर्ष विशाल मेला भरता है।
  • आंतरी के नाथ चतुर्भुज नाथ — बामनवास (लालसोट) के रिवाली गाँव में स्थित चतुर्भुजनाथ का मंदिर श्रद्धालुओं में आंतरी के नाम से जाना जाता है।

दौसा के पर्यटन व दर्शनीय स्थल

  • भाण्डारेज की बावड़ियाँ —  दौसा का भाण्डारेज गाँव प्राचीन कला व संस्कृति की मिसाल है। यहाँ भव्य बावड़ियाँ, कुण्ड, भूतेश्वर बावड़ियाँ महादेव मंदिर, हनुमान मंदिर व गोपालगढ़ स्थित हैं।
  • गेटोलाव — दौसा नगर के पास स्थित इस स्थान पर संत दादू के शिष्य सुंदरदास जी की छतरी (स्मारक) है।
  • आभानेरी — बाँदीकुई के निकट आभानेरी एक प्राचीन नगर है जो निकुंभ क्षत्रियों की राजधानी रहा है। पुरातात्विकउत्खनन में इस नगर के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहाँ के चन्द्र नामक निकुंभ राजा ने 8वीं शदी में हर्षत माता का मंदिर व चाँद बावड़ी बनवाई । यहाँ 8वीं सदी के प्रतिहारों के महामारू शैली के मंदिर है।
  • मांगरेज की बड़ी बावड़ी, दौसा  यह पाँच मंजिली विशाल बावड़ी है। इसका निर्माण यहाँ के शासक दीपसिंह कुम्भाणी और दौलतसिंह कुम्भाणी ने करवाया। यह बावड़ी एक गुप्त सुरंग द्वारा भांडारेज के गढ़ से जुड़ी है।
  • चाँदबावड़ी बाँदीकुई — रेलवे स्टेशन (दौसा) से 8 किमी. दूर साबी नदी के निकट चाँदबावड़ी के नाम से विख्यात आभानेरी बावड़ी का निर्माण 8वीं शती में प्रतिहार निकुंभ राजा चाँद ने करवाया।
  • प्रेतेश्वर भोमियाजी — दौसा दुर्ग के मोरी द्वार के बाहर सूर्य मंदिर के पार्श्व में प्रेतेश्वर भोमियाजी का मंदिर है, जो वस्तुत: आमेर के शासक पूरणमल के विद्रोही पुत्र सूजा (सूरजमल) का स्मारक है, जिसकी लाला नरुका ने यहाँ धोखे से हत्या कर दी थी। इन्हें आस-पास के क्षेत्र में प्रेतेश्वर भोमियाजी के नाम से पूजा जाता है
  • दौसा किला (गिरिदुर्ग) — देवगिरि पहाड़ी पर सूप की आकृति का किला। दौसा आरंभिक कछवाहों की राजधानी था।
  • राणा सांगा का चबूतरा — राणा साँगा की मृत्यु बसवा गाँव में हुई थी जहाँ धूप तलाई में आज भी उनका चबूतरा मौजूद है।
  • अन्य स्थल: हींगवा में नाथ सम्प्रदाय का ऐतिहासिक मंदिर, नई का नाथ तीर्थ, दौसा का किला, गुढ़ा का किला,गीजगढ़ का किला, हजरत शेखशाह जमाल बाबा की दरगाह (भांडारेज), 6 खंभों की बनजारों की छतरियाँ (लालसोट), बीजासनी माता का मंदिर तथा पत्थर उद्योग आदि।

महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • दौसा में सिकंदरा में पत्थरों की नक्काशी, बसवा में मिट्टी के बर्तन, बालाहेड़ी (महुआ) के पीतल के बर्तन व लवाण गाँव की कलात्मक दरियाँ प्रसिद्ध है।
  • दौसा दादू पंथी सुंदरदास व जगजीवन जैसे संतों की जन्मस्थली रहा है।
  • कालखो सागर जिले का सबसे बड़ा बाँध है। इसमें बाणगंगा नदी का पानी आता है। दौसा जिले के अन्य बाँधों में माधोसागर व सेंथल सागर प्रमुख है।
  • बाणगगा, मोरेल व सनवान दौसा जिले की मुख्य नदियाँ है।
  • दौसा जिले का बांदीकुई जंक्शन राजस्थान का ऐतिहासिक रेल्वे स्टेशन है। उत्तर-पश्चिम रेल्वे के जयपुर मंडल के अधीन आने वाले इस स्टेशन से 20 अप्रैल, 1874 को आगरा-फोर्ट से बांदीकुई के बीच राजस्थान में प्रथम रेलगाड़ी चलाई गई थी।
  • राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल का जन्म मण्डावर गाँव, महुआ (दौसा) में हुआ।
  • दौसा जिले का आलूदा गाँव अपनी खादी के लिए जाना जाता है। यहाँ खादी के बने तिरंगे अपना विशेष महत्त्व रखते हैं। यहाँका आलूदा गाँव में बना हुआ तिरंगा प्रथम स्वतंत्रता दिवस पर फहराया गया था।
  • लालसोट का हेला ख्याल प्रसिद्ध है।
  • ब्रजकुंवरी — रामसिंह की पत्नी। इसे ब्रजदासी के नाम से जाना जाता है। यह लवाण (दौसा) की राजकुमारी थी।
  • वस्त्र डिजाइनिंग के लिए नए प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना दौसा में हुई।
  • बन्जारों की छतरी-लालसोट (दौसा) में है।
  • माधोसागर बाँध दौसा जिले में है।
  • नई का नाथ तीर्थ स्थल लवाण (दौसा) में है।
  • पीतल के बर्तनों के लिए बालाहेड़ी (महुआ, दौसा) प्रसिद्ध है।
  • दौसा स्टेशन से 24 किमी. दूरी पर नीमला गाँव में लगभग 10 लाख टन हेमेटाइट किस्म के लौह अयस्क के भण्डार मिले हैं।

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